tag:blogger.com,1999:blog-148382042007-05-01T16:49:21.532-07:00बनारसीmanojhttp://www.blogger.com/profile/05296927692872794960noreply@blogger.comBlogger1125tag:blogger.com,1999:blog-14838204.post-1122403127464669252005-07-26T11:22:00.000-07:002005-07-26T11:38:47.466-07:00मेरी इच्छायें<br />सचमुच बहुत छोटी हैं<br />क्योंकि<br />मुझे चाहिये बस<br />हर खास मौसम में<br />एक विपरीत आभास।<br />यानि कड़ाके की सर्दी में<br />रुई के फाहे सी मुलायम धूप<br />और चिलचिलाती गर्मी में<br />शीतल शरद बयार।<br />मेरी इच्छायें सचमुच बहुत छोटी हैं<br />क्योंकि मुझे चाहिये गरीबी,घृणित बदबदाती गंदगी<br />और स्वयं से बेहतर<br />खुशहाल कामयाब जिंदगी<br />अपनी आंखों के दायरे से दूर<br />यानी मजा भरपूर<br />मुझे चाहिये<br /><br />एक अदद घरवाली<br />जिसमें हो<br />ऐश्वर्या और निरूपा<br />यानि रायोंकी शुमारी ।<br />मुझे चाहिये<br /><br />डिजाइनर बच्चे,<br />होनहार और सच्चे।<br />मुझे चाहिये-<br />बस कुछ रंजोगम<br /><br />वो भी आराम के साथ<br />और भरपूर स्वार्थ सिद्दि -<br />बिना हिलाये हाथ।<br />मुझे चाहिये<br />सभी रंग,समस्त राग<br />मुझे चाहिये -<br />एक छोट अलादीनी चिराग<br />मेरी इच्छायें सचमुच बहुत छोटी हैं।<br />हे भगवान ,<br />मेरी इन छोटी इच्छाओं को<br />जल्दी पूरा करना।manojhttp://www.blogger.com/profile/05296927692872794960noreply@blogger.com