मेरी इच्छायें
सचमुच बहुत छोटी हैं
क्योंकि
मुझे चाहिये बस
हर खास मौसम में
एक विपरीत आभास।
यानि कड़ाके की सर्दी में
रुई के फाहे सी मुलायम धूप
और चिलचिलाती गर्मी में
शीतल शरद बयार।
मेरी इच्छायें सचमुच बहुत छोटी हैं
क्योंकि मुझे चाहिये गरीबी,घृणित बदबदाती गंदगी
और स्वयं से बेहतर
खुशहाल कामयाब जिंदगी
अपनी आंखों के दायरे से दूर
यानी मजा भरपूर
मुझे चाहिये
एक अदद घरवाली
जिसमें हो
ऐश्वर्या और निरूपा
यानि रायोंकी शुमारी ।
मुझे चाहिये
डिजाइनर बच्चे,
होनहार और सच्चे।
मुझे चाहिये-
बस कुछ रंजोगम
वो भी आराम के साथ
और भरपूर स्वार्थ सिद्दि -
बिना हिलाये हाथ।
मुझे चाहिये
सभी रंग,समस्त राग
मुझे चाहिये -
एक छोट अलादीनी चिराग
मेरी इच्छायें सचमुच बहुत छोटी हैं।
हे भगवान ,
मेरी इन छोटी इच्छाओं को
जल्दी पूरा करना।
सचमुच बहुत छोटी हैं
क्योंकि
मुझे चाहिये बस
हर खास मौसम में
एक विपरीत आभास।
यानि कड़ाके की सर्दी में
रुई के फाहे सी मुलायम धूप
और चिलचिलाती गर्मी में
शीतल शरद बयार।
मेरी इच्छायें सचमुच बहुत छोटी हैं
क्योंकि मुझे चाहिये गरीबी,घृणित बदबदाती गंदगी
और स्वयं से बेहतर
खुशहाल कामयाब जिंदगी
अपनी आंखों के दायरे से दूर
यानी मजा भरपूर
मुझे चाहिये
एक अदद घरवाली
जिसमें हो
ऐश्वर्या और निरूपा
यानि रायोंकी शुमारी ।
मुझे चाहिये
डिजाइनर बच्चे,
होनहार और सच्चे।
मुझे चाहिये-
बस कुछ रंजोगम
वो भी आराम के साथ
और भरपूर स्वार्थ सिद्दि -
बिना हिलाये हाथ।
मुझे चाहिये
सभी रंग,समस्त राग
मुझे चाहिये -
एक छोट अलादीनी चिराग
मेरी इच्छायें सचमुच बहुत छोटी हैं।
हे भगवान ,
मेरी इन छोटी इच्छाओं को
जल्दी पूरा करना।

6 Comments:
क्या मासूम इच्छायें हैं। भगवान भी परेशान होगा पूरा करने को।चलो बधाई ,चिट्ठा लिखना शुरू करने के लिये।
होती है इच्छा पूरी
एक,
तो याद आती है
अङ्ग्रेज़ी की कहावत,
सोच समझ के वर माँगियो,
क्या पता
मिल जाए।
आपकी इच्छाएं कुछ ज़्यादा ही छोटी नहीं हैं? :) आपकी अगली पोस्ट का इन्तज़ार है।
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बनारस के घाटों पर आज-कल बिल्कुल चहल-पहल नहीं है। बात क्या है?
डॉ.राममनोहर लोहिया की बात याद आ गयी,'इच्छाएं अक्सर मूर्खतापूर्ण हुआ कर्ती हैं .
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