बनारसी

Name: manoj

Tuesday, July 26, 2005

मेरी इच्छायें
सचमुच बहुत छोटी हैं
क्योंकि
मुझे चाहिये बस
हर खास मौसम में
एक विपरीत आभास।
यानि कड़ाके की सर्दी में
रुई के फाहे सी मुलायम धूप
और चिलचिलाती गर्मी में
शीतल शरद बयार।
मेरी इच्छायें सचमुच बहुत छोटी हैं
क्योंकि मुझे चाहिये गरीबी,घृणित बदबदाती गंदगी
और स्वयं से बेहतर
खुशहाल कामयाब जिंदगी
अपनी आंखों के दायरे से दूर
यानी मजा भरपूर
मुझे चाहिये

एक अदद घरवाली
जिसमें हो
ऐश्वर्या और निरूपा
यानि रायोंकी शुमारी ।
मुझे चाहिये

डिजाइनर बच्चे,
होनहार और सच्चे।
मुझे चाहिये-
बस कुछ रंजोगम

वो भी आराम के साथ
और भरपूर स्वार्थ सिद्दि -
बिना हिलाये हाथ।
मुझे चाहिये
सभी रंग,समस्त राग
मुझे चाहिये -
एक छोट अलादीनी चिराग
मेरी इच्छायें सचमुच बहुत छोटी हैं।
हे भगवान ,
मेरी इन छोटी इच्छाओं को
जल्दी पूरा करना।